जुलाई 18, 2018. बीएचयू, हिंदुत्व की फैक्ट्री: कांग्रेस
कल दो बार मुझे बनारस जाने का टिकट कैंसिल करना पड़ा। तबियत ऐसी नही थी कि अकेले उतनी लंबी यात्रा कर सकूं, खासकर पिछले एक हफ्ते में लगभग पाँच हजार किलोमीटर की रेल यात्रा के बाद। कल एमए कनफ्लिक्ट मैनेजमेंट के लिए जीडी-पीआई था, जबकि आज एमए पॉलिटिकल साइंस की कॉउंसलिंग थी। कल ही ये तय हो गया कि कम से कम अगले कुछ वर्षों तक इस 'साम्प्रदायिक विश्वविद्यालय' से मेरा कोई सम्बन्ध नही रहेगा।
पिछले तीन सालों में यहाँ रहते हुए मुझे क्या हासिल हुआ, इसका जिक्र मैं कई बार कर चुका हूँ। जब इस विश्वविद्यालय की कल्पना की गई थी, तब कांग्रेस के नेता और चार बार के अध्यक्ष रहे महामना मदन मोहन मालवीय तत्कालीन विश्वविद्यालय के पद्धति से अलग भारतीय और हिन्दूवादी परंपरा के एक विश्वविद्यालय की स्थापना करना चाहते थे। उनकी कल्पना ही इतनी विस्तृत थी कि अक्सर उनके वरिष्ठ सर सुन्दर लाल उनका मजाक बनाने के लिए उनके खिलौने का हाल-चाल पूछ लिया करते थे। सर सुन्दरलाल भावी विश्वविद्यालय को खिलौना ही कहते थे। मालवीय हर बार उनसे कहते कि जब मेरा विश्वविद्यालय बनेगा, तब मैं उसका पहला कुलपति आपको ही बनाऊंगा। ऐसा ही हुआ। अगर आप कभी बीएचयू जाएं तो आपको मुख्य द्वार के पास ही चिकित्सा विज्ञान संस्थान और आधुनिक अस्पताल दिखेगा। ये अस्पताल उन्हीं सर सुन्दरलाल के नाम पर है। 'हिंदुत्व के इस फैक्ट्री' का ये अस्पताल पूर्वांचल के सर्वश्रेष्ठ अस्पताल है।
महामना के अलावा जिन दो अन्य लोगों ने इस कार्य मे महती भूमिका निभाई थी वो थें, दरभंगा महाराज और एनी बेसेंट। दरभंगा महाराज काशी में संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना करना चाहते थे। जबकि श्रीमती बेसेंट भारतीय शिक्षा को बढ़ावा देना चाहती थीं और उसके लिए उन्होंने सेंट्रल हिन्दू कॉलेज की स्थापना भी की थी। यही सेंट्रल हिन्दू कॉलेज बाद में सेंट्रल हिन्दू स्कूल बना। आज भी हर साल लाखों छात्र 'साम्प्रदायिकता को नया आयाम देने के लिए' यहां एंट्रेंस देते हैं। अफसोस, वो इंजीनियरिंग, मेडिकल, सीए, सीएस, आईएएस-पीसीएस से अधिक कुछ नही कर पाते। प्रधानमंत्री मोदी को चाहिए कि वो अविश्वास प्रस्ताव से पहले ही इस्तीफा दे दें, इतना छोटा काम भी वो नही कर सकते तो। ठीक से हिंदुत्व को भी प्रोमोट नही कर पा रहें। फिर क्या फायदा इतनी ताम-झाम वाली सरकार का। ठीक ही तो कहा है कांग्रेस ने #NaGangaKaNaDeshKa
किसी विश्वविद्यालय परिसर में मंदिर का क्या औचित्य? इसके लिए तो रिकॉर्ड चार बार के कांग्रेस अध्यक्ष रहे उस व्यक्ति की कड़ी निंदा की जानी चाहिए जिसने विश्वविद्यालय परिसर में मंदिर बनवाने जैसा काम किया। कांग्रेस का कोई अध्यक्ष ऐसा सोच भी कैसे सकता था? निंदा तो महात्मा गांधी की भी होनी चाहिए। वो कैसे राष्ट्रपिता थे जिन्होंने ऐसे व्यक्ति के लिए कहा था कि, 'There may be spots on my character, but Malviya Ji's was spotless.' मंदिर बनवाने वाले व्यक्ति के चरित्र को स्पॉटलेस कैसे कह दिया उन्होंने? वो तो भला हो प्रधानमंत्री मोदी का, कि जिनके विश्वनाथ मंदिर जाने के कारण काँग्रेस वो सब कह पाई, जो कहने में उसे आज तक दुविधा होती थी।
शिक्षा के इतने भव्य मंदिर कौन बनाता है भला? आईआईटी से लेकर आईएमएस, एग्रीकल्चर से लेकर कॉमर्स और सोशल साइंस, ऐसे भी विश्वविद्यालय बनाए जाते हैं भला? उसमें भी हिंदुत्व का फैक्ट्री बना दिया। बताइए, क्या सिखाते हैं बच्चों को... 'सर्वधर्म समभाव' और 'वसुधैव कुटुम्बकम'... ऐसे बच्चे कल के देश को खतरा तो होंगे ही! सर्वविद्या की राजधानी कहते हैं इसको... ऐसा संस्थान तो सच मे बाधा है देश के विकास में... जो पढ़ गए तो कल को सवाल तो पूछेंगे ही परिवार विशेष से...
----------------------
जब नया-नया यहाँ गया था तो लोगों के मुँह से इसके लिए 'महामना की बगिया' सुना करता था। आज जब इसका अंग नही हूँ तो महसूस कर पा रहा कि ये अपने स्वरूप ही नही, भाव और आत्मा से भी उनकी बगिया ही है। आत्मा जैसे शब्द 'हिंदुत्व-आइडियोलॉजी' के हो सकते हैं। मगर यकीन मानिए कि ये वो विश्वविद्यालय है जो अपने अंतर् रूप में,अपने निचोड़ में भी उतना ही सुंदर है जितना अपने बाह्य स्वरूप में। हर वो छात्र सौभाग्यशाली है जिसने इस निचोड़ को पी लिया। यकीन न हो तो आप देश-दुनिया के तमाम विश्वविद्यालय घूम आइए। ऐसी गहरी जड़ें,ऐसा संस्कार आपको कहीं नही मिलेगा। बिल्डिंग भले ऊंची मिल जाए!
----------------------
जब नया-नया यहाँ गया था तो लोगों के मुँह से इसके लिए 'महामना की बगिया' सुना करता था। आज जब इसका अंग नही हूँ तो महसूस कर पा रहा कि ये अपने स्वरूप ही नही, भाव और आत्मा से भी उनकी बगिया ही है। आत्मा जैसे शब्द 'हिंदुत्व-आइडियोलॉजी' के हो सकते हैं। मगर यकीन मानिए कि ये वो विश्वविद्यालय है जो अपने अंतर् रूप में,अपने निचोड़ में भी उतना ही सुंदर है जितना अपने बाह्य स्वरूप में। हर वो छात्र सौभाग्यशाली है जिसने इस निचोड़ को पी लिया। यकीन न हो तो आप देश-दुनिया के तमाम विश्वविद्यालय घूम आइए। ऐसी गहरी जड़ें,ऐसा संस्कार आपको कहीं नही मिलेगा। बिल्डिंग भले ऊंची मिल जाए!
दुर्भाग्य से जो इस संस्थान से एक बार जुड़ जाता है वो पूरा इसी का होकर रह जाता है। उस भाव को आप वहां जाकर ही समझ सकते हैं। फिर हिंदुत्व से समस्या क्या है। आप भी मानते हैं कि इस देश मे अस्सी फीसद आबादी हिंदुत्व को मानने वाली है। ऐसे में जब आपका विरोधी आप पर लगातार मुस्लिमपरस्त होने का आरोप लगा रहा,ऐसे ट्वीट्स से आप उन दावों को और पुख्ता कर रहें। फिर कम से कम काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से जुड़े लोग तो आपके ऐसी ओछी राजनीति का समर्थन करने से रहे।
ये ओछापन से अधिक बेवकूफी है। ऐसा राजनीति करने वाले नही करते। हर साल पास होने वाले दस हज़ार छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों के हिसाब से हिसाब लगा लीजिएगा कि आपने एक ट्वीट से कितना नुकसान कराया है। बाकी वर्तमान कांग्रेस को राजनीति करनी नही आती इतना तो तय है। एजेंडा सेट करने के बजाय वो विरोधियों के लाइन पर खेलते हैं।
कहीं ऐसा न हो कि कांग्रेस के आईटी सेल में बीजेपी के स्लीपर सेल वाले घुस गए हैं। वर्ना इतना बेवकूफ कोई राजनीति करने वाला तो बिल्कुल नही हो सकता।
Comments
Post a Comment