मेरी पहली कविता..
(पहली कविता, 2014 को समर्पित, कविता पर हाथ तंग है, इसलिए त्रुटिया होंगी। आपके जवाब की अपेक्षा..) याद है, जब तू आया था; तू आया था, नई उम्मीद की किरण लाया था; एक नया सवेरा, जो मेरा था; जो खोया सो खोया, अब जो भी था सब पाना था । एक गम था अपनोे को खोने का, कसक, मित्रो से दूर जाने का; जो गए-आए-गए,फिर आए और चले गए, पर अफसोस,मेँ न तोड पाया इस बंधन को । अब तू जा रहा है,फिर से एक नए सवेरे के साथ; और फिर से वही आवाज आई है, जो खोया सो खोया, अब जो भी होगा मेरा होगा ।।