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बीएचयू: वंश और विचार!

दिसंबर 22, 2019. कहानी है, उसी बीएचयू की, महामना मदन मोहन मालवीय तब कुलपति थें। उनके पुत्र का भी नामांकन हुआ, विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए। सामान्य छात्रों की तरह उन्हें भी छात्र...

क्योंकि फिर कोई फ़िरोज़ कभी संस्कृत नही पढ़ेगा!

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(दो विश्वविद्यालय है. दो मसले हैं. दोनों पर बात होनी चाहिए. मैं दोनों पर एकसाथ ही बात करना चाहता था. लेकिन बात लंबी चली जाती. हो सकता है मेरे ये विचार पॉलिटिकली करेक्ट न हों. मगर वर्तमान परिस्थितियों के हिसाब से मेरी यही समझ बनी है।) काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के नाम में हिन्दू क्यों है? इसके पीछे कई कहानियाँ है, कितने ही पक्ष हैं, बहुत सारे तथ्य भी हैं, जाहिर है इसका एक भावुक पक्ष भी है। अलग-अलग मौकों पर इन्हें अपने सहूलियत के हिसाब से उसी भावुकता के चासनी में लपेट कर परोस दिया जाता है। तथ्यात्मक बातें मगर इस संदर्भ में कम ही होती है। इस विश्वविद्यालय की संकल्पना क्यों की गई होगी, उसके मूल में क्या रहा होगा? उच्च शिक्षा का एक केंद्र बनाते समय उसे किसी सम्प्रदाय विशेष के नाम से जोड़ने का मकसद क्या रहा होगा? महामना मालवीय के प्रयासों, संघर्षों और सपनों के इस संस्था में उनके योगदानों के विषय मे आप जानते होंगे। मगर क्या आपको पता है कि महामना अपने सपनों का विश्वविद्यालय काशी में नही बल्कि अपने गृह नगर प्रयाग में बनवाना चाहते थे। दरअसल मालवीय जी के अलावा कुछ और लोग थें जिनका उद्देश्य ...

वैदिक विज्ञान, कानून और समाज: उपराष्ट्रपति महोदय की क्लास!

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'सवाल पूछने वाले बच्चे शिक्षकों को याद रह जाते हैं। अच्छे शिक्षक को तमाम प्रशंसाओं के बीच उन प्रश्नों की दरकार होती है।' सूरीनाम के उपराष्ट्रपति महामहिम माइकल अश्विन सत्येन्द्र अधीन जब अपना व्याख्यान समाप्त कर कैमरों से घिरे थे तब मेरे मन में यही अनुभवजन्य ख्याल थें। दक्षिण अमेरिकी राष्ट्र सूरीनाम में करीब तीस प्रतिशत आबादी भारतवंशियों(पूर्वी भारत) की है, जिन्हें करीब डेढ़-सदी पूर्व उस डच कॉलोनी में अफ्रीकी दासों की जगह मजदूरी करने ले जाया गया था। पलायन का दंश पीढ़ियों के सबब होता है। अपने देश मे भी पलायित होने का अहसास जब व्यक्ति को वक़्त-बेवक़्त हो ही जाता है, वैसे में सात-समंदर पार दशकों तक अपनों से कट जाने का दर्द कैसा होता होगा उसकी कल्पना भी मुश्किल है। वो दर्द और बड़ा हो जाता होगा जब कोई सदियों में लौट पाकर भी अपने और अपनों से हमेशा के लिए दूर जा चुका होता है! उसके हिस्से यहाँ कुछ नही होता! बस धुंधली हो चुकी स्मृतियां होती हैं, स्मृतियों का क्या महत्व? 'We, as dispora are proud ..... We feel obliged to protect the culture of our forefathers and we will continue ...

बोर्ड रिजल्ट्स: अधिक नम्बर पर आपत्ति, आपकी हताशा तो नही!

'सोशल साइंस और हिन्दी में पूरे नम्बर कैसे आ सकते हैं? क्या इन विषयों में इससे अधिक कुछ नही लिखा जा सकता!' परीक्षा परिणामों के बाद ऐसे आकलन बड़े आम हो जाते हैं। मुझे इस बात से बड़ी ख...

परीक्षा परिणाम: प्रिय अनुज! तुमसे संवाद का मोह...

प्रिय अनुज, आज के दिन तुम से मुखातिब होना मुझे बड़ा अच्छा लगता है। तुम्हारे वर्तमान से पांच साल आगे खड़े होकर जब तुम्हे देखता हूँ तो तब के कई पैमाने टूटते से नजर आते हैं, कई बाते...