साथी ये याद रहे : हमारी आँखों की नमी पर अधिकार उनका है!
...कई दिन बड़े बोझिल से होते हैं, ऐसे ही दिनों में कुछ कहानियाँ होती हैं, आप जानते हैं वो आपको हर बार झकझोरेंगी, रूलाएँगी... आप मगर फिर भी उन्हें पढ़ते हैं... मैं सोने की तैयारी कर रहा हूँ... मेरे टूटे हुए फ़ोन में गाना बज रहा है, 'साथी ये याद रहे, एक साथी और भी था...' न चाहते हुए मैं फिर से उन यादों में लौट गया हूँ... हम भारतीय अपने याददाश्त के मामले में बड़े कच्चे होते हैं। मगर अपने पिता के पार्थिव शरीर को सलामी देते समय उनके बटालियन का युद्ध-घोष करती हुई वो बच्ची शायद आपको याद हो? नही, 'उरी' फ़िल्म वाली नही... अल्का राय, कर्नल मुनीन्द्र नाथ राय की ग्यारह वर्षीय वो बच्ची, जो ये अच्छे से जानती थी कि 27 जनवरी 2015 का वो दिन उसके लिए क्या लेकर आया था! अभी एक दिन पहले ही गणतंत्र दिवस के मौके पर 42 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल राय को युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था। कर्नल बड़ा अधिकारी होता है। पूरे बटालियन को कमांड करता है। शिव अरूर और राहुल सिंह अपने किताब में कर्नल संतोष महादिक के बच्चों के लिए लिखते हैं कि उन्हें आश्चर्य होना चाहिए था कि क्यों...