बोर्ड रिजल्ट्स: हताश क्यों हैं ? अभी तो ज़िन्दगी शुरू हुई है, अभी तो लम्बा सफर है, और ये सफर आपका है !
मैं ये नहीं लिख रहा होता अगर कुछ हफ्तों पहले आयुष ने मुझे कॉल नहीं किया होता। पिछले दो महीनों में मुझे कम से कम पांच ऐसे लड़कों का कॉल आया होगा जो मुझे नहीं पहचानते, जिन्होंने कभी मुझे देखा नही है या ये भी नही जानते कि मैं कौन हूँ। उन्हें मेरा नंबर या तो किसी दोस्त ने दिया था या किसी रिश्तेदार ने।
आने वाले दिनों में कई परीक्षाओं के परिणाम आएंगे। हो सकता है उनमें आपका परिणाम भी हो। हो सकता है आप उसका इंतजार भी कर रहे हों। आप अपने रिजल्ट को लेकर आश्वस्त हों, गर ऐसा है तो आपको अग्रिम शुभकामनाएं !
कई ऐसे लोग भी होंगे जिन्हें अपने रिजल्ट का अंदाजा तो होगा लेकिन साथ ही ये भी पता होगा कि जो होना है, वो उतना सुखद न हो। ऐसे में मुझे लगता है कि मैं जो कुछ भी लिख रहा हूँ, अच्छा-बुरा जो भी, उन्हीं के लिए लिख रहा। आने वाला एक हफ्ता लाखों बच्चों के जीवन के आगे की दिशा को तय करेगा।
खैर, पहले ये बता दूं कि आयुष का नाम मैंने क्यों लिया। मैं उसे नहीं जानता। एक दिन अचानक मुझे एक अनजान कॉल आया और सामने वाले ने मेरा नाम पूछने के बाद अपना परिचय दिया। आगे पूछने पर उसने बताया कि वो मेरे एक फेसबुक फ्रेंड का फेसबुक फ्रेंड है। उन्होंने ही मेरा नम्बर उसे दिया था, उसने इस बार बेतिया(बिहार) से बारवीं की परीक्षा दी है। संयोगवश उससे मेरी लगभग आधे घण्टे बात हुई। ये कॉल अलग इसलिए था क्योंकि वो उन लड़कों से अलग था जो मुझे जानते हैं और खुल कर बात करते हैं, सलाह लेते हैं। अनजान होते हुए भी उसने मुझ से अपने हर समस्या पर बात की।
हाँ, तो ये परिणाम कइयों का भविष्य तय करने वाले होंगे। और अगर सोशल मीडिया के चुटकुलों को छोड़ दें तो मैं इन परिणामों के गंभीरता को जानता हूँ। मैं ये भी जानता हूँ कि आने वाले दिनों में उन्हें किन परिस्थितियों से दो-चार होना पड़ेगा। जिनके परिणाम अच्छे होंगे उन्हें तो बहुत फर्क नही पड़ेगा, पर जो अपेक्षाकृत नीचे रहेंगे उन्हें समझाने वाले बहुतायत आएंगे।
ये स्थिति ऐसी होती है, जब छात्र भ्रम में होता है। चारों तरफ देखने के बाद भी वो कुछ समझ नहीं पाता। ऐसे में जो लोग उसके भ्रम को विश्वास में बदलने आते हैं, अक्सर वो उस भ्रम को और 'दृढ़' करते चले जाते हैं। कई बार उनका व्यक्तिगत स्वार्थ इसमें छुपा होता, कई बार वो अपनी हताशा आपमें भर रहे होते हैं, जबकि कई बार वो अनजाने में ऐसा कर रहे होते हैं।
मैं नही जानता कि जो मैं लिख रहा वो आपके संदर्भ में कितना सही होगा, लेकिन यकीन मानिए कि एक बार जब आप उस भ्रम के दलदल में जाएंगे, फिर वापस आना बड़ा मुश्किल होता है। भीड़ को देख के ओपिनियन मत बनाइये। दूसरों को अपनी राय मत तय करने दीजिए। ये आपकी लाइफ है, इसका स्टीयरिंग आप खुद पकड़िए। जीवन बहुमूल्य है। आपका समय बहुमूल्य है। जो बीता है, वो बहुत कम बीता है, आगे उम्मीदों का संसार बाकी है। आगे संभावनाओं का महासागर बाकी है। उन्मुक्त होकर फैसले लीजिए। जो मन करे वो करिए।
दसवीं के बाद विज्ञान लेकर भी लोग सफल होते हैं और कला लेकर भी। स्कूल करने वाले भी अच्छा करते हैं और कोचिंग वाले भी। बारवीं के बाद लोग टारगेट भी करते हैं, और अलग-अलग जगह एडमिशन भी लेते हैं। सैकड़ो विकल्प हैं। विकल्प हर जगह है। कोई कोर्स बुरा नही है। कोई विकल्प गलत नही है। ये आपको तय करना है कि आपके लिए क्या सही है
किसी के दवाब में कत्तई मत आइए। समाज और प्रतिष्ठा के दवाब में फैसले मत लीजिए।सुनिए सबकी। मैं ये नही कहता कि लोग जो आपको बताएंगे वो गलत बताएंगे, आखिर उनका भी अनुभव है। लेकिन आपका भला आपसे बेहतर शायद ही कोई जानता है, इसलिए वही करिए जो आपका मन करे। आखिर आपकी ज़िंदगी औरों से अलग तो है ना।
कई बार ये भी होता है कि आपके अभिभावक कुछ और चाहते हैं और आप कुछ और। ऐसे में उनसे बात करिए, वो आपसे अधिक किसी चीज को थोड़े चाहेंगे। कोई भी महत्वाकांक्षा आपसे बढ़कर तो होगी नहीं ? और वो आपके कीमत पर थोड़े कुछ चाहेंगे ? अगर वो फिर भी नहीं मानते तो उनकी बात अपने दोस्तों, सीनियर, टीचर से कराइए। कोशिश करके देखिए, वो मान जाएंगे।
फिर कल को जब परिणाम आए, और बुरा आए तो मुस्कुराइए। जो मिला वो कम है क्या ? बीती सो बीती, भविष्य को खुद लिखिए। चुनिए अपनी ज़िंदगी ! वो ज़िन्दगी जो आप चाहते हैं। जहां निराशा कत्तई न हो। निराशा को एकदम हावी मत होने दीजिए। अभी उम्र ही कितनी है। अभी तो आपकी ज़िंदगी शुरू हुई है।
मैं नही जानता मेरी सलाह आपके कितने काम की होती है, लेकिन जब भी आपको जरूरत हो, आप मुझ से बात कर सकते हैं। मैं आपके लिए हमेशा उपलब्ध हूँ।
शुभकामनाएं,
अभिषेक
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