कौन होगा बिहार का 'मनोहर लाल खट्टर' ?
September 29, को लिखा गया
अभी कल ही की बात है, मैं पोलिटिकल साइंस क्लास के लिए खड़ा था कि एक मित्र (जो नए नए हमसे फेसबुक पर जुड़े थे) ने पूछ लिया कि आपके परिवार से कोई राजनीत में है क्या ?
मुझसे नकारात्मक जवाब पाकर उन्होंने उत्सुकतावश पूछ लिया कि फिर ये अंदर की जानकारियां कहाँ से लाते हैं ?
'सूत्रों से'
आगे उन्होंने न कुछ पूछा, न मैंने बताया..
बिहार चुनाव से पहले भाजपा ने अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। इसमें कुछ अनूठा भी नहीं है। पर लोगो में ये उत्सुकता जरूर है कि आखिर मुख्यमंत्री पद का दावेदार कौन होगा ?
आज गिरिराज सिंह ने कहा कि कोई पिछड़ा या अतिपिछड़ा ही सीएम होगा। मंगल पाण्डेय ने भी इसका समर्थन किया।
लेकिन अगर ये किसी खास रणनीति का हिस्सा न हो और बिहार में कोई सवर्ण मुख्यमंत्री बने तो वो हरियाणा के मनोहर लाल खट्टर के तरह ही कोई चौकाने वाला नाम हो सकता है।
भाजपा ने रोहतास जिले के दिनारा सीट से राजेंद्र सिंह को उम्मीदवार बनाया है और अगर राज्य में राजग की जीत होती है तो वो बिहार के अगले मुख्यमंत्री हो सकते हैं। 49 वर्षीय सिंह मूलतः रोहतास के रहने वाले हैं। संघ में विभिन्न पदों पर रह चुके सिंह को एक दशक पहले भाजपा में लाया गया था। इससे पहले उन्होंने झारखण्ड में भाजपा के जीत में संगठन मंत्री रहते हुए बड़ी भूमिका निभाई थी।
इससे पहले अमित शाह ने उन्हें बिहार विधान सभा चुनाव के लिए गठित 4 सदस्यीय कोर कमिटी में भी शामिल किया था, जिसमे उन्हें पटना और मगध के 9 जिलो और 58 विधानसभाओ का प्रभार दिया गया था। उनकी उम्मीदवारी तो आश्चर्यजनक थी ही, वो इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण थी कि भाजपा का कोई संगठन मंत्री चुनाव नहीं लड़ता। उसका काम भाजपा और संघ के बिच समन्वय का होता है। इससे पहले सिर्फ मोदी और खट्टर ही इस पद पर रहते चुनाव लड़े हैं !
ये सभी तर्क उनके पक्ष में है। अतः मेरी समझ से तो शायद भाजपा ने अगला खट्टर खोज ही लिया है ! बाकी अनुभव की कमी है। और राजनीती जैसा अनिश्चित विषय भी है तो आश्चर्य नहीं अगर कल को कुछ इसके इतर भी हो जाए ।
अभी कल ही की बात है, मैं पोलिटिकल साइंस क्लास के लिए खड़ा था कि एक मित्र (जो नए नए हमसे फेसबुक पर जुड़े थे) ने पूछ लिया कि आपके परिवार से कोई राजनीत में है क्या ?
मुझसे नकारात्मक जवाब पाकर उन्होंने उत्सुकतावश पूछ लिया कि फिर ये अंदर की जानकारियां कहाँ से लाते हैं ?
'सूत्रों से'
आगे उन्होंने न कुछ पूछा, न मैंने बताया..
बिहार चुनाव से पहले भाजपा ने अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। इसमें कुछ अनूठा भी नहीं है। पर लोगो में ये उत्सुकता जरूर है कि आखिर मुख्यमंत्री पद का दावेदार कौन होगा ?
आज गिरिराज सिंह ने कहा कि कोई पिछड़ा या अतिपिछड़ा ही सीएम होगा। मंगल पाण्डेय ने भी इसका समर्थन किया।
लेकिन अगर ये किसी खास रणनीति का हिस्सा न हो और बिहार में कोई सवर्ण मुख्यमंत्री बने तो वो हरियाणा के मनोहर लाल खट्टर के तरह ही कोई चौकाने वाला नाम हो सकता है।
भाजपा ने रोहतास जिले के दिनारा सीट से राजेंद्र सिंह को उम्मीदवार बनाया है और अगर राज्य में राजग की जीत होती है तो वो बिहार के अगले मुख्यमंत्री हो सकते हैं। 49 वर्षीय सिंह मूलतः रोहतास के रहने वाले हैं। संघ में विभिन्न पदों पर रह चुके सिंह को एक दशक पहले भाजपा में लाया गया था। इससे पहले उन्होंने झारखण्ड में भाजपा के जीत में संगठन मंत्री रहते हुए बड़ी भूमिका निभाई थी।
इससे पहले अमित शाह ने उन्हें बिहार विधान सभा चुनाव के लिए गठित 4 सदस्यीय कोर कमिटी में भी शामिल किया था, जिसमे उन्हें पटना और मगध के 9 जिलो और 58 विधानसभाओ का प्रभार दिया गया था। उनकी उम्मीदवारी तो आश्चर्यजनक थी ही, वो इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण थी कि भाजपा का कोई संगठन मंत्री चुनाव नहीं लड़ता। उसका काम भाजपा और संघ के बिच समन्वय का होता है। इससे पहले सिर्फ मोदी और खट्टर ही इस पद पर रहते चुनाव लड़े हैं !
ये सभी तर्क उनके पक्ष में है। अतः मेरी समझ से तो शायद भाजपा ने अगला खट्टर खोज ही लिया है ! बाकी अनुभव की कमी है। और राजनीती जैसा अनिश्चित विषय भी है तो आश्चर्य नहीं अगर कल को कुछ इसके इतर भी हो जाए ।
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