यूपी विधानसभा चुनावों पर मेरा आकलन I
February 23,2017. Kumar Abhishek:
अब जबकि यूपी आधे से अधिक सीटों के चुनाव हो चुके हैं, लोग अपने-अपने हिसाब से परिणामों का अंदाजा लगा रहे। मैं कोई राजनीतिक विश्लेषक तो हूँ नहीं, लेकिन फिर भी पिछले 4-5 चुनाव, जिन्हें मैंने फॉलो किये है। उनमें मेरे अनुमान परिणाम के करीब ही रहे हैं। इस कारण मुझे भी कभी-कभी विश्लेषक होने का भ्रम हो जाता है। फिर कई लोग लगातार फोन पर या इनबॉक्स में यूपी चुनावों पर मेरे विचार पूछते रहते हैं, ये जानते हुए भी कि आजकल मैं कम एक्टिव रहता हूँ। सामने पूछने वालों को तो मैं कई बार सीधे मना कर देता हूँ कि मुझे अंदाजा नहीं है। लेकिन अब चीजें कुछ-कुछ क्लियर हो रही हैं।
पूरे प्रक्रिया के दौरान यूपी में और फिर कुछ दिन यूपी के बाहर रहकर मैंने जो महसूस किया है उसे आपसे साझा करना चाहूंगा। मुझे लगता है इसबार के चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। पूर्ण बहुमत मिलेगा या नहीं, इसपर मैं अभी कुछ नहीं कह सकता।
भाजपा ने बिहार वाली गलतियां यहाँ भी दुहराई है। टिकट बंटवारे चुनाव हरवाने वाले थे। पार्टी अध्यक्ष की रणनीति भी बिहार की तरह ही समझ से परे थी। लेकिन पंजाब चुनाव के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने यहाँ जो सभाएं की हैं, उससे माहौल काफी हद तक बदला है।
दूसरा कारण यह भी है कि यहाँ विपक्ष बिहार की तरह नहीं है। एक तो वो बिखरा हुआ है, ऊपर से उसकी बौखलाहट भी साफ़ झलकती है। बसपा सुप्रीमो के हर भाषण में वो नज़र आता है। जहाँ तक बात सपा की है, पारिवारिक कलह से वो निश्चित ही परेशान हैं। फिर अखिलेश ने गदहा वाला बयान देकर अपने बौखलाहट को साफ़ जाहिर कर दिया है और अब शायद ही कुछ कहने को बचा है ! कांग्रेस खुद में ही रिसर्च मटेरियल है, इसलिए उसका जिक्र इस पोस्ट में सम्भव नहीं है। पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने के बाद सपा के सामने समर्पण करके उन्होंने सेल्फ-गोल ही किया है।
तो अबतक मुझे जो समझ आया है, वो ये कि यूपी चुनाव भाजपा जीत रही है। और वो अपने कारण कम, विरोधियों के गलतियों के कारण अधिक जीत रही। क्योंकि काम तो उन्होंने भी हारने वाले ही किये थे।
खैर, देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण राज्य में सबसे कम भ्रष्ट और सबसे अधिक लोकतान्त्रिक पार्टी को सत्ता में आते देखना सुखद होगा!
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