महामहिम रामनाथ कोविंद: फैसले के मायने !

मोदी आश्चर्यचकित करने के लिए जाने जाते रहे हैं। इसलिए इसकी उम्मीद तो सबको थी। बहुतों को ये भी पता था कि कोई गुमनाम सा नाम आएगा, लेकिन ऐसे किसी नाम की कल्पना शायद ही किसी ने की होगी।

आज अधिकतर लोग उनके बारे में गूगल कर रहे होंगे। लेकिन मैं बिहार से हूँ, मैंने उन्हें 2015 में तब खोजा था जब वो ऐन चुनावों के पहले बिहार के राज्यपाल बनाए गए थे। तब बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने उनके नियुक्ति का विरोध किया था। आज लगभग दो साल बाद श्री रामनाथ कोविंद देश के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार घोषित हुए हैं।

मैंने उनकी योग्यताओं को देखा है, वकालत से लेकर यूपीएससी तक और राजनीतिक करियर से लेकर सामाजिक कार्य तक। उनकी योग्यता पर कोई संदेह नहीं है। ना ही उनका दलित होना ही कोई समस्या है, जैसा कि कई लोग दलित कार्ड से नाखुश हैं।

लेकिन तमाम योग्यताओं के बाद भी वो सर्वोच्च पद के लिए सबसे योग्य चुनाव हैं क्या ? मैं मानता हूं कि राज्यपाल हमेशा ऑब्स्ट्रक्टर नहीं होता, लेकिन क्या ये दिलचस्प नहीं है कि जिस व्यक्ति के नियुक्ति का नीतीश जी ने लगभग बौखला कर विरोध किया था, आज उन्हें ही जब राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया तो उन्होंने इसे व्यक्तिगत प्रसन्नता का विषय बताया ? तब जबकि केंद्र में विरोधी दल की सरकार है और बिहार की सरकार कैसे चल रही वो आप देख ही रहें, ऐसे में अगर आप बिहार की राजनीति को समझते होंगे तो आप नीतीश जी के इस हृदय-परिवर्तन को भी आसानी से समझ सकते हैं। अगर न समझ पाएं, तो दो अलग नाम बुटा सिंह और डीवाई पाटिल का याद कर लीजिएगा।

श्री कोविंद का नाम आते ही पहली बात जो ध्यान में आई कि क्या वो मजबूत राष्ट्रपति साबित होंगे ? जबकि वो कितने मजबूत राज्यपाल रहे हैं वो हमने देखा है। राष्ट्रपति भले ही सांकेतिक शक्तियां रखता है, लेकिन वो संघ का एक मजबूत स्तम्भ होता है। संविधान का संरक्षक होने और सशस्त्र सेनाओं का सर्वोच्च कमांडर होने के साथ उसकी न्यायिक शक्तियां उसे सचमुच इस लोकतंत्र का प्रमुख बनाती हैं। फिर जब राष्ट्रपति राजेन्द्र बाबू, प्रणव दा या कलाम साब जैसा कोई होता है तो आपने देखा ही है कि वो कितना प्रभाव डालता है और कितना परिवर्तन ला सकता है।

शाम तक श्री कोविंद ने उस संशय का समाधान भी खुद कर दिया जब वो भावपूर्ण होकर कह रहे थे कि मैं मोदी जी और शाह जी को धन्यवाद देता हूँ कि उन्होंने ने मुझ जैसे सामान्य नागरिक को इस लायक समझा। जितनी बार उन्होंने 'सामान्य नागरिक' रिपीट किया उससे ही समझ आ रहा था कि वो कितने प्रभावशाली होंगे।

राष्ट्रपति सामान्य नागरिक नहीं चाहिए हमें। हमे वो चाहिए जिसमें आत्मविश्वास हो, जो उस विरासत को संभाल सके। अगर आपको इस चुनाव में सब ठीक लगता है तो आपको ये तय करना होगा कि आप प्रतिभा पाटिल जैसे चुनावों पर कुछ नहीं बोलेंगे। फिर तुम्हारा-हमारा एक-एक गलत मिल कर सही हो जाएगा। आखिर शैक्षणिक योग्यता पैमाना तो है नहीं। तब दोनों के व्यक्तित्व में आप अंतर बता दीजिए ?

किसी और से नहीं तो अपने पूर्ववर्ती अटल जी से ही सीख लेते सरकार ! क्यों हमे हर बार अपने राष्ट्रपति को गूगल करना पड़े ? कम से कम किसी ऐसे चेहरे को तो लाते जो पीएम के सामने खड़ा होकर बोल पाता। दलित ही तो किसी ऐसे दलित को लाते जो खुद के फैसले और स्टैंड ले पाता ! खैर, आपको वैसे लोग पसन्द ही नहीं शायद।

और अब जबकि ये तय है कि श्री रामनाथ कोविंद अगले राष्ट्रपति होंगे में उन्हें और राष्ट्र को, खुद को शुभकामनाएं देता हूँ और आशा करता हूँ कि मेरे अपेक्षाओं के विपरीत वो एक अच्छे तथा सफल राष्ट्रपति साबित होंगे !
-अभिषेक

Comments

Popular posts from this blog

'विद्ययामृतमश्नुते'

नकारात्मक पोस्ट: कोरोना और बिहार, मुख्यमंत्री को पत्र!

Pulwama & Valentine: This Vasant, shed your binaries like the dry leaves!

(Open) letter to my friend.