धर्म और युवा.

बात कल की है.. 9 बजे, आजतक पर पुण्य प्रसून वाजपेयी का कार्यक्रम टक्कर.. जिसमे सुब्रमण्यम स्वामी के साथ अससुद्दीन ओवैसी मुख्य वक्ता थें.. अब कल के दिन वो एक मंच पर किस मुद्दे के लिए आए होंगे, ये तो आप आसानी से समझ सकते हैं.. कार्यक्रम काफी अच्छा था.. इसलिए भी क्योंकि ये एक पैनल डिबेट नहीं था और दोनों वक्ताओं को अपनी बात रखने के लिए पूरा वक़्त मिला.. सुब्रमण्यम स्वामी अपने हँसी भर से सामने वाले को नर्वस कर दे रहे थे और ये बात एंकर और ओवैसी दोनों बखूबी समझ रहे थे..
बहरहाल, सबसे खुश कर देने वाला वाकया बहस के अंत में हुआ.. जब वहां स्टूडियो में मौजूद दर्शको को सवाल पूछने का मौका दिया गया.. वहां मौजूद एक लड़के और फिर एक लड़की ने जो बात कही वो वाकई मेरे दिल को छु गई.. दोनों ने लगभग एक तरह की बात की.. उनका कहना था, 'स्वामी जी, आप जो भी करो.. हम नए युथ को इन सबसे दूर रखो..' दिल खुश हो गया एकदम से.. खासकर तब जब उस लड़के ने कहा कि मेरी एक छोटी सी भतीजी है, वो ये सब एकदम नहीं देखना चाहती.. आप हमें इन सब में मत घसीटिये..' हालाँकि तब ओवैसी ने उनसे पूछना भी चाहा कि आपका प्राइमरी कंसर्न क्या है.. पर इसपर वो कुछ नहीं बोले..
गौर करिएगा ये बात.. हम युवा भला क्यों आपके इन घिसे पीटे बातो में पड़े.. चाहे हमारे हज़ारो लोग मर ही जाते हैं इसमें तो क्या हुआ ? हम युवा इसीलिए बने हैं क्या ? चाहे देश भीतर ही भीतर संभावित मानव बमो से भर जाए ? हम युवा इसमें क्यों पड़े.. चाहे कोई दिन दहारे हमारे घर में घुस कर किसी अपने को मार दे या चाहे कुछ हज़ार लोग आके हमारा घर तोड़ जाए ? कुछेक लाख  लोग हमारे इलाके को अशांत ही क्यों न कर जाए ? आखिर हम क्यों पड़े इसमें.. आप क्यों हम युवाओं को इस नफरत का शिकार बनाना चाहते हैं.. और भी तो काम है यार.. चाहे हर 6 महीने पर कोई बड़ा दंगा हो ही रहा तो कौन सा पहाड़ टूट रहा.. कुछेक सौ लोग ही तो मर रहे.. कुछेक परिवार ही तो उजड़ रहे.. अब बस इतने भर के लिए ही हम युवा अपने युवावस्था में आपके इस पचड़े में पड़े ?

लेकिन रुकिए भाईसाब ! वो सुब्रमण्यम स्वामी है.. सुब्रमण्यम स्वामी ! नाम सुना है न.. ? नही सुना तो चेक कर लीजिए.. आपके सभी पैमानों से बहुत ऊपर की चीज है.. जब लोग छोटे-छोटे पद के लिए क्या कुछ नहीं कर जाते तब इस आदमी ने बीते डेढ़ सालो में ही राज्यपाल, ब्रिक्स बैंक के गवर्नर, JNU के VC, अमेरिका में भारतीय राजदूत जैसे बड़े पद ठुकरा दिया है.. सब्र करिए ! अगर इस आदमी ने किसी चीज को छुआ है तो आपके अच्छे के लिए ही छुआ होगा..
स्वामी जी ने भी उस लड़के को जवाब दिया कि ऐसे में जब हज़ारो युवा खुद आकर मुझ से मिल रहे, ऐसे में आप उनका प्रतिनिधित्व करने वाले होते कौन हैं.. और आपको हमारी बात पसंद नहीं है तो आप टीवी बंद कर लीजिए..
मेरी समझ से जात और धर्म हमारे समाज के हकीकत है, आप इनसे आँख बंद नहीं कर सकते.. आपके आँख बंद कर लेने से ये गायब नहीं हो जाएंगे, बल्कि आपका और पीछा करेंगे.. कम से कम पिछले एक-डेढ़ साल के अनुभव से तो मैंने यही सीखा है.. बीते दिनों ही मेरे नाम में जातिसूचक टाइटल न होने पर एक मित्र तंज कसने लगे.. आप कितना पीछा छुड़ाएंगे.. बेहतर यही है कि आप इनमे रूचि लें.. इनको ठीक करें.. ताकि हम जिस समाज की अपेक्षा करते हैं वो वाक़ई हमारा हो.. और आखिर में मैं उन चंद लोगो से वही सवाल पूछना चाहता हूँ, आप होते कौन हैं हम युवाओं और हमारे विचारों का प्रतिनिधित्व करने वाले.. ? और हाँ एक सलाह भी है, अगर आप बहस नहीं देखना चाहते हैं तो बेहतर है, सास-बहु वाला सीरियल ही देख लीजिए न !

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