शराबबंदी को ले मुख्यमंत्री नितीश कुमार के नाम पाती।
आदरणीय नितीश जी,
सादर प्रणाम,
ये पूरा चुनाव अजीब सा था। पुरे चुनाव में जो लोग छाए रहे वो परिणाम आते ही अचानक से गायब हो गए और आप, जो पुरे चुनाव में कहीं नहीं थे, चुनावो के बाद अचानक से सब कुछ बनकर उभरें। शायद आपने खुद भी ऐसे सफलता का नहीं सोचा होगा !
चुनावो के पहले और बाद की तमाम चीजो को एक मिनट के लिए भूल जाते हैं। मेरे साथ आप भी भूल जाइए। आप किसके साथ थे, हैं, कौन उपमुख्यमंत्री कौन मंत्री। किसका राज़ था, किसका है। कैसा राज था, कैसा है कैसा होगा या नही होगा। सबकुछ भूल जाते हैं। जनता ने भी तो आपके सारे जख्मो को मरहम ही दिया है। आपके सारे विरोधियो को चुन-चुन कर हराया है। विरोधियो को तो छोड़िए, भीतर के भीतरघाती मित्रो को भी तो जनता ने नहीं छोड़ा। जीतन राम मांझी जैसे दम्भ भरने वाले नेता को भी जनता ने वहीँ पंहुचा दिया जहां से आपने उन्हें उठाया था और रमई राम जैसो को भी कहीं का नहीं छोड़ा।
अब तो देश भी आपमें न जाने क्या-क्या देखने लगा है ! खैर ये भी भूल जाते हैं।
पर लाख कोशिशों के बावजूद मैं एक चीज नहीं भूल पा रहा, वो एक बात जो आपने चुनाव के बहुत पहले कही थी। हालांकि आश्चर्य तो मुझे तब भी हुआ था कि आपने वो कहने के बदले किया क्यों नही था ? क्योंकि तब तो आचार संहिता भी नहीं लागू हुआ था। हो सकता है कमजोर सरकार थी, आपमें खुद भी आत्मविश्वास की कमी थी। लेकिन अब तो आप में भी उतना ही आत्मविश्वास है जितना मुझमे बारहवीं की परीक्षा पास कर जाने पर थी। आपकी मनोदशा को मैं सहज ही समझ सकता हूँ और मैं भी चाहता हूँ कि आप मेरी मनोदशा को समझे। माना आपकी सरकार की कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा शराब से आता है पर आपको शायद अंदाजा नहीं होगा कि उस कमाई के पीछे कितने परिवार तबाह हो जाते हैं। अगर होता तो मुझे नहीं लगता मुख्यमंत्री जी कि आप जैसा सहृदय व्यक्ति इसको इतना प्रसार देता। 2005 के पहले शायद प्रखंड मुख्यालयो में शराब का ठेका हुआ करता था, नितीश जी, आपने हर गाँव में ठेका खुलवा दिया। पता नहीं आपको इसका सुझाव किसने दिया था ? पर ये आपके सबसे गलत निर्णयो में था। लोग कहते हैं कि आपके कार्यकाल में अपराध घटा था। मैं नहीं मानता, लालू के तुलना में आपके कार्यकाल में अपराध कम भले ही हुए हो पर इस दारु ने अपराध को कई गुना बढ़ा दिया था, काश ये दारु नहीं होता ! तब ये आंकड़ा देखने लायक होता ! अनगिनत हत्याएं, बलात्कार, मारपीट, दंगे के पीछे इसका हाथ था। लेकिन समाज का एक पक्ष हमेशा छिपा हुआ रह जाता है। आपको अंदाजा है कितनी औरते जहरीले शराब या शराब पीने के बाद हुई हिंसाओं में बेवा हुई हैं ? आपको अंदाजा है कितने बच्चे अनाथ हुए हैं और कितनो की पढाई छूटी हैं ? कितने परिवार तबाह हुए हैं और कितने परिवारो के बड़े बेटे को 16 साल की उम्र में नौकरी करना पड़ा है ? मेरा परिवार खुद भी इस शराब का बड़ा भुक्तभोगी रहा है। शायद इसलिए भी दिल खुश सा हो गया था एक मिनट के लिए, बिलकुल एक बच्चे की तरह आपके सारे राजनैतिक दांवपेंचों को भूलकर, जब आपने शराबबंदी की बात की थी।
परसो शाम को ही रोहन चचा आए थे, दूर के रिश्तेदार हैं, दो बेटो और एक बेटी के बाप हैं। तीनो बच्चे 10 साल से बड़े, कई बीघा जोतने वाले जमींदार परिवार से थे। आज जीवन जीने पर भी आफत है। माँ मर गई। पत्नी मरने को है। बच्चों के पढाई पर आफत है और परिवार के खाने पर। खेत बिक गए, कर्ज हद पार कर गए। पर दारु है कि मानती नहीं। 5000 कमाएंगे तो कम से कम चार हज़ार का तो पिएंगे।
नितीश जी, बिहार में दारु सस्ती भी मिलती है, यूपी सीमा से 50-60 किलोमीटर के दुरी से भी लोग दारु के लिए बिहार आते हैं, कहते हैं 40 फीसदी सस्ती दारु मिल जाती है। पता नहीं किसने आपको इस बुरी कमाई का लत लगा दिया। आपने तो उस मंत्री जावेद को भी हटा दिया, इस दारु को क्यों नहीं हटाया ?
नितीश जी,गुजारिश है आपसे, जुमला मत बता दीजियेगा अपने बात को, वर्ना वही माताएं जिन्होंने आँखों से लेकर दिल में बिठाया था वो बहुत गालिया देंगी। इतनी कि उनकी हाय आपको लग जाए ! पर मुझे पता है नितीश जी आप ऐसा नहीं करेंगे, आपको ऐसा करना भी नहीं चाहिए, आपको दुआएं लेनी चाहिए ! यही दुआएं तो आपको और ऊपर पहुंचाएगी !
आपका,
एक बिहारी, एक भुक्तभोगी.
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